राजनीतिक दल भी अपने फायदे के लिए देहाती व्यक्ति का इस्तेमाल करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में गांवों की भागीदारी है, पर उसका वास्तविक लाभ राजनीतिक नेताओं-कार्यकतार्ओं को ही मिलता है, न कि सामान्य ग्रामीण जन को। स्थानीय निकाय तो बने हैं किंतु वे कुछेक असरदार लोगों को लाभ पहुंचाने के सिवाय आमजन के लिए कुछ नहीं कर सके हैं। इलाज, रोजगार या शिक्षा की समुचित व्यवस्था करने में असमर्थ रहे हैं।
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