श्रम विभाजन का लैंगिक विभेद किसी प्राकृतिक आधार के कारण नहीं, अपितु उस सामाजिक ताने-बाने की उपज है जहां मूल प्रश्न सत्ता पर नियंत्रण का है। इन सबसे अधिक पीड़ादायक तथ्य यह है कि महिलाओं की क्षमता पर प्रश्न उठाने वाली पितृसत्तात्मक व्यवस्था आवश्यकता अनुरूप महिलाओं के श्रम को विकल्प के रूप में इस्तेमाल करती है।
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