हम आजादी के बाद वैज्ञानिक चेतना के नारे तो दीवारों पर लिखते रहे हैं, लेकिन समाज में वैज्ञानिक चेतना दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती। वहां पथरी, पीलिया, कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज से लेकर सामान्य बुखार और दस्त के इलाज भी झाड़-फूंक से होते रहते हैं।
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