बंदी के इस दौर में लोगों ने घर में रह कर राष्ट्र की आराधना की है। सामूहिकता, पड़ोसी भाव, रिस रहे रिश्ते की मजबूती, अपनत्व, आत्मीयता, उदारता, सेवा-भाव को उचित स्थान मिला है। ‘कोई भूखा नहीं रहेगा’ का भाव जगा है। सरकार के आग्रह और नागरिकों के कर्तव्य से संकट की इस घड़ी में नागरिकबोध का जागरण हो रहा है।
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