पिछले कई वर्षों से दुनिया भर में बड़े पैमाने पर हो रहे पर्यावरणीय क्षरण और भविष्य में इसके बदतर होने की आशंका जताई जा रही है। यहां पर यह विचारणीय है कि कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन, मिट्टी, जल और वनों की गुणवत्ता में हानिकारक बदलाव हुए हैं। साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी उपलब्धियों के बीच अंतर कम होने के बावजूद आय के वितरण की स्थिति दुनिया के अधिकतर देशों में प्रतिकूलता की ओर अग्रसर हुई है।
from Jansattaराजनीति – Jansatta https://ift.tt/2WlQieq
via
- Blogger Comment
- Facebook Comment
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
0 comments:
Post a Comment