पूर्णबंदी की घोषणा के समय ही प्रवासी कामगारों को उनके कार्यस्थल पर ही रोकने की पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए थी और सरकार को यह जिम्मेदारी नियोक्ता पर डालनी चाहिए थी। इसके एवज में सरकार इन प्रतिष्ठानों को मुआवजा देने का एलान करती। कारोबारी संस्थान संभावित हानि के खतरे से परे हट कर अपने श्रमिकों की देखभाल करते।
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