आजादी के बाद हमने गांधी जी के बताए मार्ग को दकियानूसी मानते हुए उसे तिलांजलि दे दी। परिणाम आज सामने है। गरीबी बढ़ती जा रही है। कम से कम तीस फीसद जनता आज भी गरीबी की रेखा के नीचे जी रही है। बेकारी भी बढ़ी है। शिक्षितों की बेकारी भी बढ़ी है। साथ-साथ विषमता भी कम होने के बदले बढ़ ही रही है।
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