भारत जैसे देश में महिला श्रमबल भागीदारी को सही मायनों में अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन कहा जाए, तो अतिशयोक्ति न होगी। महिला श्रमबल की उचित भागीदारी बढ़ा कर हम देश को तीव्र विकास की ओर ले जा सकते हैं। लेकिन सबसे पहले महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी को बढ़ाना होगा, इसके लिए नियम-कानूनों में बदलाव की दरकार होगी।
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