नेपाल के राजनीतिक दलों के नेता काठमांडू स्थित अमेरिकी और चीनी दूतावास के बीच फंसे हुए हैं। यह सच्चाई है कि ताकतवर मुल्कों और वैश्विक संस्थाओं से मिलने वाले कर्ज, आर्थिक सहायता और अनुदानों से गरीब और विकासशील देशों के राजनीतिक दलों और नेताओं के अपने हित सधते हैं। यही हाल नेपाल का है।
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