दुनिया की दवा निर्माता कंपनियों के पास धन की कोई कमी नहीं है। लेकिन नए रोगाणुओं की नई दवा या टीका बनाने की खोज बेहद खर्चीली, अनिश्चितता से भरी और लंबी अवधि तक चलने वाली होती है। इसलिए दवा कंपनियों को ऐसे अनुसंधानों में कोई रुचि नहीं है।
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