शक्तिहीन समूहों का हाशिये पर धकेला जाना लोकतंत्र, खासकर सामाजिक लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसा लगने लगा है कि वैश्वीकरण के बाद जनतंत्र में से ‘जन’ को ‘कॉरपोरेट लॉबी’ द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है। यह ‘जन’ अब इतना हाशिये पर है कि इसकी कोई भी व्यथा राज्य सरकारों को सुनाई नहीं देती।
from Jansattaराजनीति – Jansatta https://ift.tt/33VLUbt
via
- Blogger Comment
- Facebook Comment
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
0 comments:
Post a Comment