हमारे यहां परंपरागत रूप से शादी के बाद बेटियों को परिवार का सदस्य नहीं माना जाता। अब जब वे जन्म के साथ ही पिता की पैतृक संपत्ति की अधिकारी मानी जाएंगी, तो जीवन के प्रतिकूल हालात में यह पुश्तैनी जायदाद उनके लिए मददगार साबित हो सकेगी।
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