वास्तव में तो मांग बढ़ने से ही हमारी समस्या हल होगी। किंतु मांग सहज ही नहीं बढ़ती है। यह हमारी क्रय शक्ति पर निर्भर करती है। अत: शासन को देश की क्रय शक्ति बढ़ाने का भी प्रयास करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले देश के अंतिम व्यक्ति को कुटीर उद्योगों से जोड़ा जाए। आम व्यक्ति जो भी उत्पादन करता है, उसे कच्चे माल के रूप में या फिर उत्पाद के रूप में शासन को खपाने का प्रयास करना होगा।
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