घरेलू बचत के कारण ही देश में करोड़ों लोग आर्थिक आघात को काफी हद तक झेल गए हैं, लेकिन अब उनके लिए घरेलू बचत का सहारा भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक इस साल जून तक देश के शहरों में रहने वाले करीब 13.9 करोड़ लोगों की बचत समाप्त होने को है।
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