भारत की चिंता यह है कि अब महिंदा राजपक्षे श्रीलंका का संविधान बदलने, अल्पसंख्यक तमिलों के संवैधानिक अधिकारों के साथ छेड़छाड़ करने और राष्ट्रपति की शक्तियों को बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इससे न केवल श्रीलंका के तमिल प्रभावित होंगे, बल्कि भारत की आंतरिक और बाह्य राजनीति भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएगी।
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