देश भर के निजी विद्यालयों में बेहद कम वेतन पर काम करने वाले लाखों शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं और रोजी-रोटी के लिए भटक रहे हैं। इससे पता चलता है कि पहले के शिक्षालय, शिक्षा, शिक्षण और शिक्षक मानकों के किन शिखरों पर शोभायमान थे और आज कितनी तीव्रता से रसातल की ओर बढ़ रहे हैं।
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