लड़कियों की तरह लड़कों को भी सीख देकर, उनकी हदों का एहसास करा कर उन्हें बेलगाम होने से रोका जा सकता है। वे कब, क्या करते हैं, किससे मिलते हैं, उनके मित्र-परिचित कौन हैं, इसकी पूरी जानकारी परिवार वालों को होनी चाहिए। ये कदम जब उनमें सुधार लाएंगे तो स्वाभाविक रूप से समाज में भी बदलाव आएगा और बलात्कार, छेड़खानी जैसे जघन्य अपराध भी कम होने लगेंगे।
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