महिलाओं के शोषण को सिर्फ कानून बना कर नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जरूरत है कानून के साथ-साथ सामाजिक सुधार और लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की। इसके लिए नीति निर्माताओं को सामाजिक तौर पर मूल्यों, मान्यताओं और संस्कृति से जुड़े सभी पहलुओं पर काफी सोच-विचार कर प्रचार-प्रसार के तरीके अपनाने चाहिए।
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