सरकारी क्षेत्र में काम करने वालों के पास भले ही दशकों से सामाजिक सुरक्षा का कवच बना हुआ है, लेकिन निजी क्षेत्र में यह कवच बहुत ही पतला है। निजी क्षेत्र में भी सिर्फ संगठित निजी क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का थोड़ा-सा इंतजाम है। लेकिन भारी-भरकम असंगठित क्षेत्र में यह व्यवस्था लगभग शून्य ही है। छोटे से संगठित निजी क्षेत्र में पेंशन के नाम पर जो रकम मिलती है, उससे तो महीने भर क्या हफ्ते भर का भी गुजारा भी संभव नहीं है।
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