विश्व के समक्ष एक जो बहुत बड़ी चुनौती उभरी है, वह है- साथ-साथ रहना सीखना! ऐसी कोई शिक्षा व्यवस्था जो केवल ज्ञान देने का प्रयत्न करती है और परीक्षा के प्राप्त अंकों को ही उपलब्धि का मानक मानती है, इसमें सहायक नहीं हो सकेगी। भारत को ऐसे शिक्षित युवा तैयार करने हैं जो हर प्रकार की विविधता को स्वीकार करते हुए किसी भी क्षेत्र में योगदान करने की क्षमता से युक्त हों।
from Jansattaराजनीति – Jansatta https://ift.tt/2VpH9lc
via
- Blogger Comment
- Facebook Comment
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
0 comments:
Post a Comment