अदालत के लगातार प्रयासों का राजनीतिक दलों और मतदाताओं पर अपेक्षित असर न होना भी सिद्ध करता है कि अगर अपराधी विजेता बने हैं तो माना यह भी जाएगा कि जनता ने उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि जान कर भी उनको चुना है। क्या हमें इस पर आत्मचिंतन नहीं करना चाहिए कि मतदाताओं की पसंद ऐसे उम्मीदवार क्यों बन रहे हैं?
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