पर्यावरण को हो रहे नुकसान के कारण ही जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे वर्षाचक्र गड़बड़ा रहा है। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी के सिर पर पीने का पानी और पर्याप्त कृषि उपज का संकट मंडराने लगा है। अगर इसी तरह पर्यावरण तबाह होता रहा तो आगे चल कर एक आर्थिक दुर्घटना को टालना मुश्किल नजर आ रहा है।
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