जब अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों की गति में तेजी आती है, तो चीन को पसीना आने लगता है। इसका मूल कारण तिब्बत है। चीन के क्रांतिकारी नेता माओत्से तुंग ने एक पंक्ति में तिब्बत की सामरिक अहमियत बता दी थी। उन्होंने कहा था कि ‘तिब्बत दंत शृंखला है और चीन जिह्वा। जब तक दांत मजबूत हैं और बंद हैं तब तक चीन के लिए कोई खतरा नहीं है, लेकिन जैसे ही दंत शृंखला में सेंधमारी होगी, चीन की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।’
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