भारतीय परंपरा में माता-पिता और सास-ससुर, बेटे, दामाद तथा बेटी, बहू जैसे रिश्ते दो परिवारों को जोड़ने के लिए, उनके सुख-दुख को साझा करने के लिए, एक-दूसरे का संबल बनने के लिए बनाए गए हैं। उसमें इस वैचारिक गिरावट को कतई जगह नहीं दी जानी चाहिए कि बेटा-बहू ही अपने माता-पिता की जिम्मेदारी उठाएंगे।
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