विगत कुछ सालों में मौसम परिवर्तन के कारण वर्षा की अनियमित स्थिति, कम वर्षा आदि को देखते हुए उद्योगों को अपनी जल खपत पर नियंत्रण करना सीखना चाहिए। साथ ही दूषित जल का समुचित उपचार कर इसे फिर से उपयोगी बनाया जाना चाहिए, ताकि जलस्रोतों के अत्यधिक दोहन की स्थिति से बचा जा सके।
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