नानाजी मानते थे कि नवनिर्माण का कार्य समाज और विशेष रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति के साथ मिल कर किया जा सकता है। राजनीतिक सीमाओं में बांध कर समाज के पुनरुत्थान और नवरचना का काम आसानी से संभव नहीं है।
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