उम्मीद है कि निजी क्षेत्र के बैंकों को सरकारी काम करने की अनुमति देने से निजी क्षेत्र के बैंक भी देश के विकास और सामाजिक क्षेत्र की पहल को आगे बढ़ाने में बराबर के साझीदार होंगे और देश के करोड़ों बैंक उपभोक्ताओं को लाभ होगा। छोटे और मझोले आकार के सरकारी बैंकों का निजीकरण पुनर्पंूजीकरण की राजकोषीय चुनौतियों की चिंताओं को कम करेगा।
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