यह एक विरोधाभास ही है कि हम मनुष्य के मस्तिष्क को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, पर बाढ़, सूखा, हिमनदों के टूटने, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं को नहीं रोक पा रहे हैं। अतिसूक्ष्म विषाणु के प्रकोप को भी रोक पाने में समर्थ नहीं हैं। इसलिए मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्यों काम नहीं आती।
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