भाषा और विज्ञापनों की दुनिया लैंगिक असमानता की वे अदृश्य बाधाएं उत्पन्न करती है, जिन पर विशेष रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। लैंगिक असमानता से निपटने के लिए जरूरी है कि समाज की विचारधारा को परिवर्तित किया जाए, उन पूर्वाग्रहों को खंडित किया जाए जो स्त्री और पुरुष को दो अलग दायरों में समेटने का सिर्फ इसलिए प्रयास करते हैं, जिससे पितृसत्तात्मक व्यवस्था का अस्तित्व कायम रह सके।
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