सवाल है कि अगर यह सालाना उपक्रम है तो इस आपदा को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। क्या जंगल की आग रोकने वाले संसाधन कम हैं, लापरवाही है या आग भड़कने या भड़काने की जबरिया कोशिशों का जोर इतना है कि किसी का उस पर वश नहीं चलता।
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