समतामूलक संसाधनों के बंटवारे के क्रम में सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए पहली आवश्यकता शिक्षा तक पहुंच है। गुणात्मक शिक्षा के विमर्श पर पहुंचने से पहले शिक्षा के संख्यात्मक विकास और प्रसार को सार्वभौमिक बनाना होगा। सबको शिक्षा और समान शिक्षा के लिए अनगिनत आयोगों, रिपोर्ट और दस्तावेजों की वकालत के बावजूद स्कूलीकरण के आंकड़े प्रोत्साहनजनक नहीं हैं।
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