अनेक अवसरों पर यह प्रश्न उठता रहा है कि परीक्षा पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन तभी हो सकते हैं जब पाठ्यचर्या और पाठ्यक्रम निर्माण के समय व्यक्तित्व विकास के सभी पक्षों का ध्यान रखा जाए। इसमें अभी तक केवल सीमित सफलता ही मिली है। अब उम्मीद है कि पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार होगा जो बच्चों पर बोझ नहीं बनेगा।
from Jansattaराजनीति – Jansatta https://ift.tt/3aqSMQR
via
- Blogger Comment
- Facebook Comment
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
0 comments:
Post a Comment