जिस अनुपात में देश की आबादी बढ़ी है, साक्षरता बड़ी है, सरकारी नौकरियां उस रफ्तार से नहीं बढ़ीं और मौजूदा वैश्विक परिदृश्य और आर्थिक स्थितियों के चलते यह अब संभव भी नहीं है। छठे और सांतवें वेतन आयोग द्वारा सरकारी कर्मचारियों की बेहताशा वेतन वृद्धि ने भी सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि वेतन, पेंशन पर खर्चे इसी रफ्तार से बढ़ते रहे तो सरकार कंगाल हो जाएगी। इसीलिए सरकारी नौकरियां कम करने की कवायद जारी है।
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