महामारी के चलते ऊर्जा और उत्साह से भरा किशोर उम्र का दौर सामाजिक, शारीरिक और शैक्षिक गतिविधियों से दूर हो गया है। यह ठहराव मन को थकान और जीवन को उत्साहहीन बना रहा है। संक्रमण की दूसरी लहर में पूरे के पूरे परिवार संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों में अवसाद और मानसिक उलझनें भी जड़ें जमा रही हैं और बच्चे डर, बैचेनी, अनिद्रा और अवसाद की चपेट में भी आ रहे हैं।
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