देह व्यापार एक सामाजिक व्याधि है, जिसका दोषी यौनकर्मी महिलाओं को ही ठहराना पूर्णतया अनुचित है। यह क्रय और विक्रय की वह प्रक्रिया है, जिसमें पुरुषों की भी समान भूमिका होती है। तो फिर यह घृणा सिर्फ स्त्री के हिस्से क्यों। अगर सामाजिक व्यवस्था प्रत्येक व्यक्ति को जीविकोपार्जन के संसाधन उपलब्ध कराने में सफल हो, तो क्यों महिलाएं अपने देह का व्यापार करेंगी।
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