असम को सालाना बाढ़ के प्रकोप और भूमि क्षरण से बचाने के लिए ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों की गाद सफाई, पुराने बांध और तटबंधों की सफाई तथा नए बांधों का निर्माण जरूरी है। मगर सियासती खींचतान के चलते ब्रह्मपुत्र की लहरों का कहर जैसे वहां की नियति बन चुका है।
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