देश में प्रदूषण को रोकने को लेकर नियमों की कमी नहीं है, पर अमल में ला पाना तब संभव होगा जब सहभागी दृष्टिकोण और प्राकृतिक पर्यावरण के साथ दो तरफा भूमिका निभाई जाएगी और ऐसा करना और करवाना सुशासन भरा कदम कहा जाएगा। सुशासन एक गंभीर चेतना और चिंता है जो नागरिक को न केवल विकास देता है, बल्कि समस्याओं के प्रति समावेषी दृष्टिकोण भी बांटता है।
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