देश की व्यवस्था पर उपभोक्ताओं का जो भरोसा होता है, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार उस भरोसे पर हमला करते हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि सरकार ने भ्रष्टाचार को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन उस अनुपात में सफलता कम मिल पाई है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा तभी संभव है जब घूसखोरी और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए और सख्त कानून बनें और उन पर अमल में सख्ती हो।
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