पितृसत्तात्मक व्यवस्था में यह सोच बहुत गहरे पैठी हुई है कि जमीन पुरुषों के नाम ही होनी चाहिए। नौकरी के लिए पुरुषों के शहरी क्षेत्रों में प्रवास के बाद पूरे एशिया में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। बावजूद इसके अभी भी जमीन का मालिकाना हक महिलाओं के नाम नहीं के बराबर है। यही नहीं, विवाहित महिलाओं से उनके पीहर पक्ष द्वारा निरंतर दबाव बनाया जाता है कि वे पैतृक संपत्ति पर अपना अधिकार छोड़ दें।
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