अलग-अलग सेवाओं के लिए ढेरों हेल्पलाइन नंबरों की भरमार जनता में सिवाय दुविधा बढ़ाने के और कुछ नहीं करती। इसके अलावा असंख्य हेल्पलाइनों से जुड़े कर्मचारी काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी भी नहीं हो सकती। ऐसे में ज्यादातर हेल्पलाइन हाथी के दांत जैसी दिखावटी व्यवस्था बन कर रह जाते हैं। साफ है कि अगर हेल्पलाइन रूपी आपातकालीन नंबर हमेशा सक्रिय नहीं रखे जा सकते और इनके जरिए लोगों की मदद नहीं हो सकती है, तो इन्हें बंद करना ज्यादा बेहतर होगा।
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