देश में एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या में बढ़ोतरी एक खतरनाक असंतुलन और खर्चीली स्वास्थ्य प्रणाली को भी जन्म दे रही है। सीटों की यह संख्यात्मक बढ़ोतरी देश में कुछ राज्यों के इर्दगिर्द ही सिमटी है और तीन चौथाई राज्य इस नीतिगत सुधार के फायदों से वंचित हैं। नतीजतन देश का आम आदमी मानक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निजी क्षेत्र पर ही निर्भर है।
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